“यूं ही नहीं हंसकर बातों को टाल देता हूं, आंखों में कुछ दर्द के आंसू है उन्हें छुपाता हूं! रो-रो कर चिल्ला चिल्ला कर दुनिया को बताना हमें भी आता है। मगर हर बात का खामोशी से जवाब देता हूं।”
आज साल 2025 समाप्त हो रहा है तो मन में जो बात थी वह आज आप सभी मित्रों के समक्ष रखी जाए।
पांच साल पूर्व युवा पीढ़ी को शिक्षा से जोड़कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का अभियान चलाया गया था। जिसके तहत हमारे समाज में युवा शिक्षा की और बढ़ रहें थे और सरकारी नौकरियों में अवसर पा रहे थे। लेकिन कुछ कारणों के चलते वह थोड़ी शिथिल हो गई।
इस मिशन की बदौलत हमारे समाज व देश की दिशा और दशा में परिवर्तन आ रहा था।हमारा समाज व देश जिसे लोग पिछड़ा और खेती-बाड़ी पर निर्भर रहने वाले सोचते थे। इस मिशन के जरिए उस सोच को और उस बेड़ियों को तोड़ कर शिक्षा का अलख जगाया जा रहा था।
वर्ष 2020 से जिला गाजियाबाद से शुरू हुई इस गांव गांव तक पहुंचने वाली मुहिम में पहले कई जिले जुड़े। उसके बाद सात राज्यों तक यह मिशन विस्तारित हों गया। पिछले पांच साल में कम से करीब 5000 युवा इस मिशन की बदौलत सरकारी नौकरियों में लगे हैं। इसका सबसे बड़ा गवाह खुद मैं हूं। मेरी बेटी और बेटा को उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस में जाने का अवसर इस मिशन से जुड़कर मिला है। आगे भी युवा पीढ़ी इस मिशन के जरिए सरकारी नौकरियों में भर्ती होने के सपनों को साकार करने में लगी है।
सब कुछ ठीक – ठाक चल रहा था। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों तक ने इस मिशन की न केवल भरपूर सराहना की बल्कि युवा शक्ति को गांव गांव में शिक्षा से जोड़ने का नया अध्याय भी शुरू किया। मिशन का लक्ष्य ( 2027 तक देश के सभी गांवों में लाइब्रेरी स्थापित किया जाना ) भी सफल हो रहा था। टीम के हौसले बुलंद थे। 24 घंटे मिशन एजुकेशन की ही सोच और संकल्प के साथ ही गांव गांवों का दौरा किया जा रहा था। लेकिन इस दौरान जैसे मिशन की गति धीमी पड़ गई।
मिशन से जुड़े लोगों के मन में कुछ सवाल आए और फिर ये सवाल खुद सवाल बन गए। टीम का हर सदस्य यही सोच रहा था कि इस अभियान को देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए इसका क्या ब्लूप्रिंट हो और वह कैसे इसको आगे तक ले जाया जाए?
हालांकि हर सवाल का जवाब होता है। मैंने इन सवालों को ना केवल गहराई से अध्ययन किया बल्कि हर एक पहलू का मंथन किया। यही नहीं बल्कि हर एक सवाल का समाधान कराने का भी लक्ष्य रखा। कई बार वार्ता हुई और अभी भी मंथन जारी है। लेकिन अंतिम उद्देश्य तक एक मजबूत टीम के द्वारा कैसे आगे पहुंचा जाए यह अभी भी चैलेंज बना हुआ है।
हमारे व हमारी टीम के युवा साथियों के मन में मलाल है और नए साल को लेकर जोश भी है। अब नया साल है । यह साल पिछले साल के सवालों को हल करने का होगा। मिशन एजुकेशन की गति किसी भी कीमत पर धीमी नहीं पढ़नी चाहिए और ना हीं रुकनी चाहिए। पांच साल की मेहनत और लगन से जिस तरह गांव गांव जाकर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का अभियान चल रहा था वह इस गति पर जारी रहना चाहिए ।
यह मेरा अनुभव है कि किसी भी देशव्यापी बड़े कार्य को करने के लिए एक अच्छे मार्गदर्शक व लीडरशिप की आवश्यकता होती है। लेकिन इस समय यह भी महत्वपूर्ण है कि लीडरशिप का दिल अपनी टीम के प्रति बड़ा होना चाहिए ?
हम सबके लिए साल 2026 की यही सबसे बड़ी चुनौती है। छोटे-मोटे आपसी मतभेदों को छोड़कर एक बड़े दिल के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जिससे कि यह देश (आप और हम 2047) तक एक विकसित राष्ट्र बन सके व उसको विकसित राष्ट्र बनाने में हम सब अपनी आहुति लगा सके। इसी मनोकामना के साथ आप सभी को नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।
