एमाइलोडिओसिस के लिए बहु-विषयक उपचार मॉडल की जरूरतः डॉ. तुलिका

चेतना प्रकाश संवाददाता
नई दिल्ली। एमाइलोडिओसिस जैसी अत्यंत दुर्लभ और गंभीर बीमारी को लेकर जागरूकता, शिक्षा तथा इससे जुड़े सहायक मुद्दों पर केंद्रित एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवाद का आयोजन विश्व युवक केंद्र परिसर में किया गया। “एमाइलोडिओसिस: अवेयरनेस, एजुकेशन एंड कोलेटरल इश्यूज़ – फ्रॉम डिस्पेयर टू कनेक्टेड केयर” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन राम दयालु सिंह सस्टेनेबल डेवलपमेंट फाउंडेशन (आरडीएसएसडीएफ) के अंतर्गत एमाइलोडिओसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया (एएसजीआई) द्वारा विश्व युवक केंद्र के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स दिल्ली के हेमाटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. तुलिका सेठ, आरडीएसएसडीएफ एवं एएसजीआई के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सतीश चंद्रा, सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. बी.एस. विवेक, डॉ. सुधीर, डॉ. नीतिशा तथा विश्व युवक केंद्र के सीईओ उदय शंकर सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस मौके पर आरडीएसएसडीएफ के ट्रस्टी पीएस सिंह, मुक्ता भारद्वाज, सौम्या, अंकिता, अभिजीत, डॉ. डीडी तीवारी सहित कई अऩ्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. तुलिका सेठ ने कहा कि जिस प्रकार एमाइलोडिओसिस एक दुर्लभ बीमारी है, उसी तरह इसका समय पर और सटीक निदान भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे में केवल मरीजों में ही नहीं, बल्कि चिकित्सकों के बीच भी नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों और शोध-आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। डॉ. सेठ ने सुझाव दिया कि यदि इस बीमारी को आयुष्मान भारत पैकेज के साथ एकीकृत किया जाए तो उपचार और देखभाल के बेहतर तथा व्यापक परिणाम सामने आ सकते हैं। साथ ही, उन्होंने इस क्षेत्र में संगठित और संस्थागत शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्लभ रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए समाज, नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच समन्वय अनिवार्य है तथा एमाइलोडिओसिस जैसे रोगों के लिए बहु-विषयक उपचार मॉडल विकसित किए जाने चाहिए।

आरडीएसएसडीएफ एवं एएसजीआई के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सतीश चंद्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि कई मामलों में यह बीमारी कैंसर से भी अधिक घातक सिद्ध होती है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं इस रोग से पीड़ित हैं और इसकी पीड़ा तथा जटिलताओं का प्रतिदिन सामना करते हैं। इसी व्यक्तिगत अनुभव ने उन्हें इस विषय पर व्यापक स्तर पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जनवरी से देश का पहला वर्चुअल एमाइलोडिओसिस क्लिनिक प्रारंभ करने की घोषणा की, जिसके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों के मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधे जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जागरूकता बढ़ाने के लिए डॉक्यूमेंट्री निर्माण सहित कई अन्य पहलें भी की जा रही हैं।

विश्व युवक केंद्र के सीईओ उदय शंकर सिंह ने कहा कि उनका संगठन नियमित रूप से एमाइलोडिओसिस विषय पर विशेषज्ञों के संपर्क में रहता है और एएसजीआई मरीजों तथा चिकित्सकों के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से मरीजों को जानकारी, समर्थन और संबल प्रदान करना ही इस संयुक्त प्रयास का मुख्य उद्देश्य है।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मरीजों और उनके परिजनों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से ऑनलाइन माध्यम से 300 से अधिक लोग भी जुड़े। उद्घाटन सत्र के बाद चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कुल मिलाकर यह संवाद न केवल जागरूकता का सशक्त मंच बना, बल्कि नीति और व्यवहारिक स्तर पर ठोस पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।

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