डॉ. कलाम का सपना अब ‘विकसित भारत 2047’ बन रहा है हकीकतः मुरुगन

चेतना प्रकाश संवाददाता
नई दिल्ली। भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 94वीं जयंती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘स्पेस मिशन–2025’ का समापन नई दिल्ली स्थित एनसीयूआई सभागार एवं कन्वेंशन सेंटर में हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य था—डॉ. कलाम की वैज्ञानिक दृष्टि और युवाओं में अनुसंधान, नवाचार तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करना। समापन सत्र में इसरो, डीआरडीओ और डॉ. कलाम परिवार के सदस्यों की उपस्थिति ने आयोजन को गौरवशाली बना दिया।

इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने रामेश्वरम स्थित डॉ. कलाम स्मारक से अपने संदेश में कहा, “डॉ. कलाम का सपना था—विकसित भारत 2020। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वह सपना ‘विकसित भारत 2047’ के रूप में साकार हो रहा है। चंद्रयान और आदित्य जैसे मिशनों की सफलता उसी दृष्टि का परिणाम है। डॉ. कलाम की सरलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आज की पीढ़ी को सीख लेनी चाहिए।”

वहीं, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने अपने संबोधन में युवाओं को ‘माई भारत पोर्टल’ से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को नीति निर्माण से जोड़ने के लिए एक सशक्त मंच तैयार कर रही है। उन्होंने कहा, “आने वाला भारत युवाओं का भारत है। स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से केंद्र सरकार युवाओं को नवाचार की दिशा में आगे बढ़ा रही है। डॉ. कलाम ने जिस वैज्ञानिक भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने में नई पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।”

कार्यक्रम में इसरो की वैज्ञानिक श्रीमती निगार शाजी (परियोजना निदेशक, आदित्य-एल1 सौर मिशन) और डॉ. पी. वीरमुथुवेल (परियोजना निदेशक, चंद्रयान–3) सहित देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और लगभग एक हजार छात्रों ने भाग लिया। छात्रों ने विज्ञान, अंतरिक्ष और रॉकेट प्रौद्योगिकी पर आधारित अपने अभिनव प्रोजेक्ट, मॉडल और शोध प्रस्तुत किए। आयोजन के दौरान विज्ञान प्रदर्शनी, तकनीकी कार्यशालाएं, क्विज़ प्रतियोगिता और छात्र नवाचार पुरस्कार मुख्य आकर्षण रहे।

संगोष्ठी के तीसरे दिन राष्ट्रपति भवन में भी समारोह आयोजित हुए, वहां राष्ट्रपति द्वारा डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही पूरे देश में विभिन्न संस्थानों में ‘विकसित भारत’ के उनके सपने को साकार करने का संकल्प दोहराया गया। उधर, रामेश्वरम में भी डॉ कलाम की समृति में बने नेशनल मेमोरियल में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. कलाम के परिवार के सदस्यों—ए.पी.जे.एम. जैनुलाबुद्दीन, डॉ. ए.पी.जे.एम. नजिमा मरैकयार, ए.पी.जे.एम. शेख दाऊद और डॉ. ए.पी.जे.एम. शेख सलीम ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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